प्यार : आचार्य चतुरसेन शास्त्री उसने कहा―”नहीं” मैंने कहा―”वाह!” उसने कहा―”वाह” मैंने कहा―”हूँ-ऊँ” उसने कहा―”उहुँक” मैंने हँस दिया, उसने भी …
प्यार : आचार्य चतुरसेन शास्त्री

प्यार : आचार्य चतुरसेन शास्त्री उसने कहा―”नहीं” मैंने कहा―”वाह!” उसने कहा―”वाह” मैंने कहा―”हूँ-ऊँ” उसने कहा―”उहुँक” मैंने हँस दिया, उसने भी …
तेरे ख़तों की ख़ुशबू तेरे ख़तों की ख़ुशबू में, तेरा चेहरा नज़र आता है। हर अक्षर में धड़कन बनकर, …