दो बाँके भगवतीचरण वर्मा दो बाँके: भगवती चरण वर्मा शायद ही कोई ऐसा अभागा हो जिसने लखनऊ का नाम …
दो बाँके: भगवती चरण वर्मा

दो बाँके भगवतीचरण वर्मा दो बाँके: भगवती चरण वर्मा शायद ही कोई ऐसा अभागा हो जिसने लखनऊ का नाम …
अध्यक्ष महोदय (मिस्टर स्पीकर) (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई विधानमंडलों में थोड़ी नोंक-झोंक, दिलचस्प टिप्पणी, रिमार्क, हल्की-फुल्की बातें सब कहीं चलती …
ज्वाला और जल: हरिशंकर परसाई (ज्वाला और जल हरिशंकर परसाई की आरम्भिक रचनाओं में से एक है जिसके केन्द्र में …
रानी नागफनी की कहानी-2 : हरिशंकर परसाई होना बीमार और लगना पेनिसिलिन अस्तभान अब रात-दिन नागफनी के चित्रों को देखता …
रानी नागफनी की कहानी: हरिशंकर परसाई यह एक व्यंग्य कथा है। ‘फेंटजी’ के माध्यम से मैंने आज की वास्तविकता के …
हलधर फिर हुंकार उठे हम लौट जाएँगे-नरेंद्र कुमार (जलंधर) हम लौट जाएँगे हमारा पानी वापिस दो हमारी मिट्टी वापिस दो …
कमल और मुरदे (कहानी) : धर्मवीर भारती “कमल ? लेकिन स्वर्ग में तो कमल होते ही नहीं !” देवदूतों ने …
एक-पत्र (कहानी) : धर्मवीर भारती डियर राबर्ट, सुना है तुम कामन्स की बैठक में बंगाल के अकाल की जाँच की …
हिन्दू या मुसलमान (कहानी) : धर्मवीर भारती सरकारी अस्पताल के बरामदे में 30 लाशें एक कतार में रक्खी हुई थीं। …
कफन चोर (कहानी) : धर्मवीर भारती सकीना की बुखार से जलती हुई पलकों पर एक आँसू चू पड़ा। ‘‘अब्बा!’’ सकीना …